Holika Dahan 2024 हर साल क्यों मनाई जाता है कब जाने सारी जानकारी

आपको बता दे की होली (Holi festival)एक रंगों का त्यौहार है। और लोग एक दूसरे को आबीर लगाकर बड़े धूमधाम से होली को मानते हैं। और इसके पीछे बहुत बड़ा राज छिपा हुआ है । जिन्हें हम इस पोस्ट में बताएंगे। तो आप इसको अंत तक पूरा स्पष्ट रूप से पढ़ है सारी जानकारी आपको इस पोस्ट में मिल जाएगी ताकि आप होलिका दहन क्यों होता है इसका शुभ मुहूर्त कब है। और इसका स्टोरी क्या है इसके जानने के लिए आपको पूरा पोस्ट को स्टेप बाय स्टेप पढ़ना होगा जिससे आपको सारी जानकारी स्पष्ट रूप से मिल सकेगा।

आपको बता दे की होलिका दहन या छोटी होली के रूप में धूमधाम से देखने को मिल सकता है। ताकि होलिका का शुभ मुहूर्त और इतिहास से लेकर महत्व बहुत बड़ा है। ताकि यहां पर सब कुछ जो लोग शुभ अवसर पर बहुत सारे भगवान आदि बनाते हैं । पुआ पूरी भी और और एक दूसरे के प्रेम पूर्वक होली का त्यौहार मनाया जाता है जिससे लोग एक दूसरे को रंग लगाकर और लोरी गाकर इस त्यौहार को बड़े धूमधाम से मनाते हैं। तो चलिए इसके बारे में सारी जानकार डिटेल में जानते हैं जो किया स्टेप बाय स्टेप बताया गया है।

Holika Dahan 2024 हर साल क्यों मनाई जाता है कब जाने सारी जानकारी

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त (Holika Dahan Subh muhrut)

आपको बता दे कि हमारे देश में बहुत से पर्व को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है । और इस दिन होली हो दीपावली हो मकर संक्रांति हो या रक्षाबंधन आदि हिंदुओं के महत्व मुख और त्योहार में से एक है जो कि हमारे देश में आजकल विदेश में भी धूमधाम से मनाने लगे हैं । और ऐसे में बहुत सारे लोग कोली को इस त्यौहार के रूप में मानने लगे इस होली को भाईचारा के रूप में देखा गया है और इसे इस दिन पकवान भी लोग बनाते हैं ताकि एक दूसरे घर पर बैठकर होली खेल के और इसको हुआ पूरी और कचौड़ी ताकि सब लोग खा सकते हैं। और बहुत ही प्रेम पूर्वक मानते हैं

आपको बता दे की ऐसे में हिंदू धर्म में लोग बड़े ही कोई भी पर्व को बहुत श्रद्धा पूर्वक मानते हैं। ऐसे में से एक हिंदू पंचांग के अनुसार होलिका दहन हर साल फागुन मास के पूर्णिमा तिथि के दिन ही मनाया जाते हैं। और ऐसे में होलिका दहन के अगले दिन ही रंग और अबीर को एक दूसरे को लगाकर खेला जाता है साथ में होली खेलने के साथ आज का नकारात्मक शक्ति का भी दहन किया जाता है। इसीलिए हर साल हिंदू भाई बहन होली को बहुत ही प्रेमपूर्वक मानते हैं और एक दूसरे को अभी गुलाब लगते हैं और नाचते गाते भी है। और पूरी पकवान भी कहते हैं।

होली दहन का शुभ मुहूर्त टाइम (Holika Dahan ka Subh Time)

ऐसे में पंचांग के अनुसार हर साल होलिका दहन रविवार 24 मार्च 2024 के दिन ही किया जाता है। और होलिका का मृदा कल समाप्त होने के बाद ही कि जाती है। और आपको बता दे की ऐसे में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 24 मार्च की रात 11:13 से लेकर अगले दिन यानी की 25 मार्च का रात 12:00 कर 27 मिनट तक हो सकता है। और ऐसे में होलिका दहन की पूजा के लिए कल समय एक घंटा 14 मिनट मिल रहा है और ऐसे में आप शुभ मुहूर्त में होलिका दहन भी कर पाते हैं और इसके लिए शुभ भी माना गया है और इसके कई सारे लाभ भी देखने को मिल सकता है।

होलिका दहन परंपरा कब से शुरू हुई ।

आपको बता दे की हमारे देश में बहुत ही पुराना परम अपनी कथा के अनुसार हिरण कश्यप ने अपने बेटे को दंडित करने के लिए अपनी बहन होलिका से मदद का गौहर मांगा था। और उसके लिए उन्होंने प्रशिक्षित भी की किया था। उनके पास एक चुनरी था। जो कि जिसे पहनकर वह आग में बैठी तो भी नहीं जलता इसलिए उन्होंने अपने बेटे को आग में बैठकर उसे ढक कर बोल बोले थे । जिसे धक ढकने के बाद कोई भी आज का असर नहीं होता ऐसे में हिरण कश्मीर और होली का ने पहलाद को जिंदा जलाने का योजना बनाई थी ।

और ऐसे में होली का ने अपने धोखे से पहलाद के अपने साथ आग में बैठा लिया था बैठा ली थी। और देवीय हस्तक्षेप के वजह से पहलाद भगवान विष्णु ने उन्हें बच्चा लिए और होली का उसे आग में जलकर भस्म हो गए। तो इसी प्रकार पहलाद उसे चुनरी से उड़कर अग्नि में बैठी जी आज का कोई असर नहीं हुआ । और उन्हें भगवान की माया था जो की हवा चलने से ऊपर चुनरी मुड़कर पहलाद पड़ जा कर गिरा और ऐसे प्रहलाद बच गया।

आपको बता दे की पहलाद एक बार फिर से बच गया। और होलिका दहन और उसके तुरंत बाद भगवान विष्णु नरसिंह रूप में के अवतार लिए और गोधूलि बेलियानी ना दिन और ना रात ना डकैती ना स्थित ना मंदिर ना दलहेज किरण हस हिरण कश्यप को अपने नाखून से क्या कर मार डालते हैं । और ऐसे में पूरे देश में होली का से एक दिन पहले होलिका दहन का परंपरा किया जाता है और उसी दिन से पूरे देश में होलिका दहन के रूप में मनाया जाता है। और उसे दिन पूरी कहानी जीत जीत होता है । और यही कारण था कि होलिका 1 दिन दहन के रूप में किया जाता है।

होलिका दहन के दिन क्या करें और क्या ना करें।

आपको बता दे की होली का फागुन माह के पूर्णिमा तिथि को होता है। और इस दिन होलिका दहन के दिन बहुत भी महत्वपूर्ण माना जाता है । और इस दिन होलिका दहन के दौरान कुछ नियम जो होते हैं। जिनको ध्यान में रखकर होली को प्रोग्राम किया जाता है। तो ऐसे में आप भी अगर जानना चाहते हैं। कि इस दिन क्या करें और क्या ना करें। तो इसके बारे में स्टेप बाय स्टेप नीचे बताया गया है । जिससे आप पढ़कर सारी जानकारी ले सकते हैं ।

  • होलिका दहन के दिन सुबह में स्नान करके साफ कपड़े पहन के और एक स्वच्छ स्थान पर चुने गए। आज में जलने के लिए लकड़ी को पेर ,गाय के गोबर , तिल , सूखा नारियल और गेहूं के दाने को इकट्ठे करके किया जाता है।
  • आपको बता दे की कुछ चीज को जैसे की तमाशक चीज जैसे मांस शराब सेवन करने से बचना चाहिए। और परंपरा के अनुसार कल और नीले रंग या सब सफेद रंग का कपड़ा पहनने से बचना चाहिए।
  • होलिका दहन के दिन आपको आपूर्ति के लिए वास्तु जैसे की फुल मिठाइयां , नारियल, गेहूं और बुराई के दूर करने वाली शुभ वस्तुएं शामिल करें । होली दहन से पहले पूजा जरूर करना चाहिए।
  • आपको बता दे की , होलिका दहन के दिन पैसा उधार देने से आपको बचना चाहिए । क्योंकि यह शुभ नहीं माने जाते हैं । और ऐसे में व्यक्ति का आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।

होलिका दहन के पूजन मंत्र जो कि इस प्रकार है

  • होलिका दहन का पूजन मंत्र होलिका दहन के समय पूजा में होली का भक्त पहलाद और विष्णु के नरसिंह अवतार से संबंधित मित्रों का जाप करें।
  • होलीका मंत्र- ओम होलिकाय नमः
  • भक्त प्रहलाद के लिए मंत्र- ओम प्रहलादाय नमः
  • भगवान विष्णु के लिए मंत्र – ओम नृसिंहय नमः

जिसका शादी नहीं होता है उसके लिए उसके लिए इस दिन शुभ विवाहित किसी प्रकार का दोष है। तो उनको दूर करने के लिए होलिका दहन के रात्रि को एक पान के पत्ते पर बताशा और हल्दी और सबूत की गांठ रखकर होलिका दहन में अर्पित करते हैं। तो आपको इससे लाभकारी होता है । और इसके साथ शिवजी और माता पार्वती का भी ध्यान करना चाहिए । इस उपाय से विवाह के योग जल्द ही बन जाते हैं।

भद्र क्यों नहीं किया जाता हैं।शुभ काम

आपको बता दे कि शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में किसी भी काम को शुभ कार्य नहीं माना जाता है । ऐसे में आप परपरी कथाओं के अनुसार भद्रा सूर्य देव की पुत्री थी । और यह स्वभाव से बहुत ही क्रोधी और उग्र थी और ऐसे में जहां भी हुआ होती थी वहां पर अपने स्वभाव के चलते सब कुछ नष्ट कर देती थी । ऐसे में मान्यता है कि भद्र तीन लोगों में भ्रमण करती है। और जब बर्द्र पृथ्वी लोक पर होती है तो किसी तरह का शुभ और मंगलिक के कार्य नहीं होता है।

होलिका दहन होने के पीछे का कहानी क्या है। (Histrory of Holika Dahan)

आपको बता दे की ,यह दिन रंगों का त्यौहार है । और ऐसे में रंगों का त्योहार होली से पहले होने वाली होलिका दहन के पीछे बहुत पुरानी घटना , जो की पारंपरिक कहानी से मिलती है। और ऐसे में पहले पहलाद के अटूट विश्वास और बुराई पर अच्छाई की विजय की जीत की कहानी से मिलता है । और आपको बता दे की, दूसरी कृष्ण और राधा रानी से जुड़ा हुआ पारीक कथाएं है जो की होलिका दहन के प्रचलित पारंपरिक कथा जिसके अनुसार होलिका दहन के या परंपरा शुरू हुआ है।और इस दिन इसका था को पुरानी परंपरा कथा भी माना जाता है।

ऐसे में हिरण का हिरंकाश्यप नामक एक राजा रक्षक राजा था । जो की तत्व के इस भगवान वर्मा के अमरता का वरदान प्राप्त था वह ना तो मरेगा। और ना ही रात में और नहीं मनुष्य और नहीं जानवर से तो, ऐसे में वरदान प्राप्त करके वह हिरंकाश्यप बहुत अहंकारी हो गया था। तो ऐसे में उन्हें वह बहुत अत्याचार भी सब लोगों पर करता था । जिससे लोग भी बहुत परेशान थे । और वह अपना गुणगान गाने के लिए सभी लोग को बोलना था। जिसमें से उनका बेटा था। जो कि भगवान विष्णु के परम भक्त थे जिनका नाम पहले था । वह सिर्फ विष्णु भगवान के ही पूजा करते थे ।

और वह अपना पिता को यानी कि हिरण कश्यप को नहीं करते थे। तो ऐसे में हिरंकाश पर बहुत क्रोधित हुआ और उन्हें कितना बार करने के प्रयास किया गया। फिर भी वह नहीं मार पाए । तो ऐसे में अपने पुत्र प्रहलाद को जन्म पिता के बजाय विष्णु के प्रति भक्ति रखता था । और उन्हें पूजा अर्चना के कारण राजा हिरंकाश्यप उसकी भगवान विष्णु के प्रति बहुत ही प्रेम भक्त थे । और उन्हें वह विष्णु को पूजा करते थे। वैसे मैं अपने पुत्र को क्रोधित होकर मरवाने के लिए उन्होंने बहुत सारे प्रयास किया ।

जिसमें वह असफलता रहे तो लास्ट में उन्होंने अपनी बहन को आज में लेकर उन्हें बैठने के लिए बोले क्योंकि उनके पास एक चुनरी था। जिससे वह नहीं जल सकती थी। तो ऐसे में वह पहलाद बन जा बच जाता है ।अतः हिरण कश्यप के पहलाद ढली पर्वत के नीचे फेंक दिया । और ढकोली का उल्लेख श्री भागवत पुराण के 9 में स्कंद से मिलते हैं।

F&Q

होलिका दहन की कहानी क्या है।(Holika Dahan of story)

आपको बता दे कि इस दिन पहलाद ने भगवान विष्णु के नाम का जाप किया जाता है । होलिका का अनुरोधक वस्त्र प्रहलाद के ऊपर आ गया और वह बच गया । जबकि होली का भस्म हो गई थी । मान्यता यह है कि, कब से ही बुराई पर अच्छाई की जीत हुआ। इसी के उत्साह के रूप में सदियों से हर साल होलिका दहन मनाया जाता है। और इस परपरी कथाओं को दहन की कथा पाप का पाप पर धर्म का विजय का प्रतीक है।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त कब है।

इस बार फागुन के पूर्णिमा तिथि 24 मार्च को 9:05 से शुभ और इसका समापन 25 मार्च को होगा इसी पूर्णिमा तिथि को दो दिन तक रहेगी वैदिक पंचांग के अनुसार होलिका दहन 24 मार्च से लेकर रात्रि 11:12 मध्य रात्रि 12:31 के बीच किया।

होलिका दहन का अर्थ क्या होता है।

होलिका दहन का प्रमुख बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है ।

होलिका दहन किसके प्रतीक है।

ऐसे में होलिका दहन बड़ा अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। और होलिका दहन के किसी भी ब्रिज और शाखों को जमीन के गडकर उसे चारों तरफ से लकड़ी को उपले चढ़कर निश्चित मुहूर्त रूप में जलाया जाता है।

Read more

Conclusion:-

आपको Holika Dahan 2024 हर साल क्यों मनाई जाता है ।कब जाने सारी जानकारी से संबंधित सारी जानकारी इस पोस्ट में स्पष्ट रूप से बताए हैं ।और बताए गए जानकारी में कोई भी प्रश्न आपके मन में है । तो आप हमें कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हैं । और बताए गए । जानकारी में जानकारी अगर अच्छा लगा हो तो , आप अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जैसे कि व्हाट्सएप ,फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर पर शेयर कर सकते हैं। धन्यवाद!!!!!!

Leave a Comment